गणेेेश शंकर विद्यार्थी का व्यक्तित्व एवं कृतित्व भावी पीढ़ी और पत्रकारिता जगत के लिए प्रेरणादायक : डॉ वत्स


नई दिल्ली, 26 अक्टूबर, 2026। अखिल भारतीय स्वतंत्र पत्रकार एवं लेखक संघ के राष्ट्रीय महामंत्री शिक्षाविद डॉ दयानंद वत्स भारतीय ने सोमवार को संघ के मुख्यालय बरवाला में प्रख्यात पत्रकार, कर्मठ समाजसेवी और स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय गणेश शंकर विद्यार्थी को उनकी 136वीं जयंती पर उनकी पुण्य स्मृतियों को अपने श्रद्धासुमन अर्पित किए।

डॉ दयानंद वत्स भारतीय ने कहा कि गणेश शंकर विद्यार्थी पत्रकारिता के भीष्म पितामह और निर्भीक कलम के सिपाही थे। उनकी लेखनी ने अंग्रेजी शासन की नींव हिलाकर रख दी थी। उनके लेखों और निबंधों में भावात्मकता, ओज, गांभीर्यता, निर्भीकता, सरलता ओर प्रवाहमयता स्पष्ट परिलक्षित होती है। उन्होंने कर्मयोगी, स्वराज्य, अभ्युदय, हितवार्ता, सरस्वती समाचार पत्र पत्रिकाओं में अपनी कलम से नए भारत का नवनिर्माण किया।

विद्यार्थी जी ने साप्ताहिक प्रताप को दैनिक प्रताप में परिवर्तित कर एक संपादक, एक लेखक के रूप में राष्ट्रहित में जनजागरण का महत्वपूर्ण कार्य किया। वे स्वतंत्रता संग्राम के अमर सेनानी थे। आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी उनकी लेखनी के प्रशंसक रहे ओर अपनी पत्रिका सरस्वती में विद्यार्थी जी ने अपना लेख आत्मोसर्ग प्रकाशित कराया। वे बाल गंगाधर तिलक, महात्मा गांधी से बहुत प्रभावित थे। उनकी लिखी शेखचिल्ली की कहानियां पाठक आज भी चाव से पढ़ते हैं।

आत्मोसर्गता नामक संग्रह में उनकी अपूर्व शैली के दर्शन होते हैं। उनके सारे निबंध त्याग और बलिदान पर आधारित हैं। दयानंद वत्स ने कहा कि गणेेेश शंकर विद्यार्थी का व्यक्तित्व एवं कृतित्व भावी पीढ़ी और पत्रकारिता जगत के लिए प्रेरणादायक है।

Disclaimer: This news is written on the basis of information received from different authentic sources.

Popular Tags

Related Post