नई दिल्ली, 9 अक्टूबर। दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार प्रदूषण नियंत्रण के लिए लगातार ठोस कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) द्वारा सरकारी और निजी निर्माण परियोजनाओं का नियमित एवं औचक निरीक्षण किया जा रहा है। धूल नियंत्रण संबंधी नियमों का पालन नहीं करने पर संबंधित परियोजना एजेंसियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्पष्ट कहा कि प्रदूषण नियंत्रण के नियमों का पालन हर हाल में करना होगा। कोई भी सरकारी विभाग, निर्माण एजेंसी, ठेकेदार या निजी कंपनी कानून से ऊपर नहीं है। सरकारी परियोजनाओं पर भी वही नियम लागू होंगे, जो निजी निर्माण कार्यों पर लागू होते हैं। दिल्लीवासियों को स्वच्छ हवा उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है।
डीपीसीसी द्वारा निर्माण स्थलों की नियमित निगरानी एवं निरीक्षण
सर्दियों में प्रदूषण बढ़ने की आशंका को देखते हुए डीपीसीसी द्वारा निर्माण और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का निरीक्षण किया जा रहा है। दिल्ली जल बोर्ड, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई), दिल्ली मेट्रो/सेंट्रल विस्टा परियोजना और नेशनल बिल्डिंग्स कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनबीसीसी) की कुछ परियोजनाओं में धूल नियंत्रण संबंधी कमियां पाई गईं।
इनमें पटपड़गंज औद्योगिक क्षेत्र में दिल्ली जल बोर्ड का सीवर लाइन बिछाने का कार्य, पंजाबी बाग से टिकरी कलां तक एनएच-9/रोहतक रोड का 17.2 किलोमीटर लंबा गलियारा, मुंडका मेट्रो स्टेशन और मुंडका औद्योगिक क्षेत्र के आसपास के स्थल शामिल हैं। इसके अतिरिक्त केंद्रीय सचिवालय मेट्रो स्टेशन के निकट दिल्ली मेट्रो/सेंट्रल विस्टा परियोजना तथा सरोजिनी नगर और नेताजी नगर में एनबीसीसी की जीपीआरए परियोजना का निरीक्षण किया गया।
डीपीसीसी ने नियमों का पालन नहीं करने वाली परियोजना एजेंसियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। उल्लंघन की गंभीरता के अनुसार निर्माण कार्य रोकने, बिजली आपूर्ति काटने और पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाने जैसी कार्रवाई प्रस्तावित है।
दिल्ली सरकार शीतकालीन प्रदूषण कार्ययोजना के तहत वाहन उत्सर्जन, सड़क एवं निर्माण स्थलों की धूल, औद्योगिक प्रदूषण, कचरा जलाने और प्रदूषण के हॉटस्पॉट पर समयबद्ध कार्रवाई कर रही है। एक अक्टूबर से ‘नो पीयूसीसी, नो फ्यूल’ पहल भी लागू की गई है।
एकीकृत कमांड ऐंड कंट्रोल सेंटर के माध्यम से तकनीक आधारित निगरानी मजबूत की जा रही है। निर्माण एजेंसियों को सामग्री और मलबा ढकने, पानी का छिड़काव करने, आवश्यकतानुसार एंटी-स्मॉग गन चलाने और धूल फैलने से रोकने के निर्देश दिए गए हैं।
