नई दिल्ली, 27 अक्टूबर, 2026। आदिकवि साहित्यकार वाल्मीकि की जयंती एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में द्वारका स्थित इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती के नैऋत्य केंद्र ने भास्कराचार्य कॉलेज ऑफ एप्लाइड साइंसेज के सभागार में ‘राष्ट्र साधना के सौ वर्ष’ काव्य गोष्ठी का आयोजन किया। इस अवसर पर कवियों ने अपनी रचनाओं से वाल्मीकि का स्मरण कर संघ की सौ वर्षों की यात्रा के विविध आयामों को काव्यात्मक अभिव्यक्ति दी।
गोष्ठी में राष्ट्रीय संघ की सौ वर्षों की यात्रा से जुड़े विविध विषयों पर कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। इनमें संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार, द्वितीय सरसंघचालक गुरुजी, हिंदू संगठन, दैनिक शाखा के संस्कार केंद्र के रूप में महत्व, भगवा ध्वज को गुरु मानने की परंपरा, पथ संचलन, प्रचारकों का समर्पित जीवन, प्रशिक्षण वर्ग का आनंद, विभाजन की विभीषिका के समय किए गए राहत कार्य, प्राकृतिक आपदाओं में सेवा कार्य, आपातकाल की संघर्ष गाथा, विविध संगठनों की भूमिका, सेवा कार्य, सामाजिक समरसता, गौ सेवा, ग्राम विकास, परिवार प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, नागरिक अनुशासन तथा स्वबोध जैसे विषय प्रमुख रहे।
